बाज़ार

बाज़ार

-मुकेश रावत (mukeshrawat705@gmail.com

यह दुनिया एक बाज़ार है,

हर शख्स एक सौदागर।

यहाँ सपने कुचले जाते हैं

भावनाऐं नीलाम हो जाती हैं।।

हर चीज की एक कीमत है,

हर कीमत पर एक ग्राहक ।

शराफत का कोई मोल नहीं,

कैडियों के भाव वो बिकती है।।

हर रिश्ता एक समझैता है,

समझैता इन्सान की कमजोरी।

हर जीत में एक पराजय है,

हर पराजय में एक जीत।।

यहाँ सपने बेचे जाते हैं,

यहाँ रिश्ते तैले जाते हैं।

नर-नारी सब कठपुतली हैं,

बस पैसा है जो बोलता है।।

भगवान किराये पर मिल जाता है,

मंदिर-मस्जिद अब सूने हैं।

धरती-अंबर सब लुट गए हैं,

विकास का परचम अब लहराता है।।

यह दुनिया एक बाज़ार है,

हर शख्स एक सौदागर।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.