Who Am I -An Inquiry About the Self

-Mukesh Rawat Lying on my bed I closed my eyes Took some deep breaths And I was wondering… What am I? Who am I? and more importantly… Why am I? Am I student? Am I a friend? Am I a son? Or Am I something else? If I am a student- Should I always see…

बाज़ार

बाज़ार -मुकेश रावत (mukeshrawat705@gmail.com यह दुनिया एक बाज़ार है, हर शख्स एक सौदागर। यहाँ सपने कुचले जाते हैं भावनाऐं नीलाम हो जाती हैं।। हर चीज की एक कीमत है, हर कीमत पर एक ग्राहक । शराफत का कोई मोल नहीं, कैडियों के भाव वो बिकती है।। हर रिश्ता एक समझैता है, समझैता इन्सान की कमजोरी।…

सुनो वीर भगत सिंह !

अडसठ वर्ष आजादी के होने को आये पर गुलाम है स्वप्न आज भी तुम्हारा | जो तुमने कभी सोचा नहीं देखो हमने वो आज कर डाला || सुख – समृद्धि का सपना जो तुमने गोरी हुकूमत में पाला – पोसा | देखो हम वीर सपूतों ने आज आजादी पाकर उसे मिटा डाला || भारत माता…